मेरे दिल में जलने लगी हैं आग
तू ही बता दे आज
की इस आग को बुझाऊं कैसे?
कुछ ही दिन पहले मुझे लगा
की तू ही हैं वोही जिसे मैं धुन्धता हूँ अब तू ही दे बता की उन सपनो को दफनाऊ कैसे?
ऐसी क्या खता की मैंने की
हर रिश्ता दुश्वार हुआ
कल तक था जो अपना
आज वोही गद्दार हुआ
उन बातों को भूल जाऊं कैसे?
दिल में हैं जो आग तू ही बता उसे बुझाऊं कैसे?
क्या मैं गलत था जो तुझे अपना माना
तेरी हर बात को पत्थर की लकीर जाना
चाहे दे दे मुझे कोई भी सजा
बस बता दे मुझसे दूर जाने की वजह
क्या हुआ जो ऐसी गाज़ गिर गयी
महसूस हुआ जिंदगी मेरी विपदा से घिर गयी
तू ही दे बता अब इनसे निकल पाऊं कैसे?
दिल में हैं जो आग तू ही दे बता की आज उसे बुझाऊं कैसे?
"ऐनी"
(ANI)
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